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भागवत में कृष्ण सुदामा मिलन व श्रीकृष्ण और रुक्मणी विवाह के साथ 7 दिन की श्रीमद् भागवत कथा का हुआ समापन

सिरोही,28 नवम्बर।सिरोही स्तिथ विजय पताका तीर्थ के पास श्री बाल गोपाल गौशाला सेवा समिति प्रांगण में चल रही श्रीमद भागवत कथा के सातवे दिन रविवार को कृष्ण सुदामा मिलन व
श्रीकृष्ण रुक्मणी विवाह का आयोजन हुआ जिसे बड़े ही धूमधाम से मनाया गया।
श्रीमद भागवत कथा के सातवे दिन कथावाचक संत श्री राजाराम जी महाराज के परम शिष्य परम पूजनीय संत श्री कृपारामजी महाराज उन्होंने कहा कि कथा के दौरान श्रोताओं को जीवन के उद्धार के लिए कलयुग में हरि कीर्तन करने को कहा। कहा कि व्यक्ति को हाथ से काम, मुख से श्रीराम का जाप करना चाहिए। साथ ही लोगों से प्रेरणा स्रोत बनने का आग्रह किया। वहीं वसुधैव कुटुम्बकम को आधार बताते हुए सम्पूर्ण विश्व को अपना परिवार मानकर चलने की बात कही। पवनदेव महाराज ने युवाओं को व्यसन और फैशन को छोड़कर सत्संग को अपनाने का संदेश दिया।
‘स्व दामा यस्य स: सुदामा’ अर्थात अपनी इंद्रियों का दमन कर ले वही सुदामा है। सुदामा की मित्रता भगवान के साथ नि:स्वार्थ थी उन्होंंने कभी उनसे सुख साधन या आर्थिक लाभ प्राप्त करने की कामना नहीं की लेकिन सुदामा की पत्नी द्वारा पोटली में भेजे गये चावलों में भगवान श्री कृष्ण से सारी हकीकत कह दी और प्रभु ने बिन मांगे ही सुदामा को सब कुछ प्रदान कर दिया।श्रद्धालुओं को बताया कि सुदामा के आने की खबर पाकर किस प्रकार श्रीकृष्ण दौड़ते हुए दरवाजे तक गए थे। “पानी परात को हाथ छूवो नहींं, नैनन के जल से पग धोये।” अर्थात श्री कृष्ण अपने बाल सखा सुदामा की आवभगत में इतने विभोर हो गए कि‍ द्वारका के नाथ हाथ जोड़कर और अंग लिपटाकर जल भरे नेत्रोंं से सुदामा का हालचाल पूछने लगे। इस प्रसंग से हमें यह शिक्षा मिलती है कि मित्रता में कभी धन-दौलत आड़े नहीं आती। सुदामा चरित्र की कथा का प्रसंग सुनाकर श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया
भगवान कृष्ण ने 16 हजार कन्याओं से विवाह कर उनके साथ सुखमय जीवन बिताया। भगवान श्रीकृष्ण रुकमणी के विवाह की झांकी ने सभी को खूब आनंदित किया। । भागवत कथा के सातवे दिन कथा स्थल पर रूकमणी विवाह के आयोजन ने श्रद्धालुओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। श्रीकृष्ण रुकमणी की वरमाला पर जमकर फूलों की बरसात हुई।
कृपारामजी महाराज ने भागवत कथा के महत्व को बताते हुए कहा कि जो भक्त प्रेमी कृष्ण रुक्मणी के विवाह उत्सव में शामिल होते हैं उनकी वैवाहिक समस्या हमेशा के लिए समाप्त हो जाती है कथा श्रवण के दौरान स्थानीय महिलाओं पर पांडवों के भाव अवतरित हुए। जीव परमात्मा का अंश है इसलिए जीव के अंदर अपारशक्ति रहती है यदि कोई कमी रहती है वह मात्र संकल्प की होती है संकल्प एवं कपट रहित होने से प्रभु उसे निश्चित रूप से पूरा करेंगे उन्होंने महारास लीला श्री उद्धव चरित्र श्री कृष्ण मथुरा गमन और श्री रुक्मणी विवाह महोत्सव प्रसंग पर विस्तृत विवरण दिया श्री रुक्मणी विवाह महोत्सव प्रसंग पर व्याख्यान करते हुए उन्होंने कहा कि रुकमणी के भाई रुकमि ने उनका विवाह शिशुपाल के साथ सुनिश्चित किया था लेकिन रुक्मणी ने संकल्प लिया था कि वह शिशुपाल को नहीं केवल गोपाल को पति के रूप में वरण करेंगे उन्होंने कहा शिशुपाल असत्य मार्गी है और द्वारिकाधीश भगवान श्री कृष्ण सत्य मार्गी है इसलिए वो असत्य को नहीं सत्य को अपना एगी अंत भगवान श्री द्वारकाधीश जी ने रुक्मणी के सत्य संकल्प को पूर्ण किया और उन्हें प|ी के रूप में वरण करके प्रधान पटरानी का स्थान दिया रुक्मणी विवाह प्रसंग पर इस प्रसंग को श्रद्धा के साथ श्रवण करने से कन्याओं को अच्छे घर और वर की प्राप्ति होती है और दांपत्य जीवन सुखद रहता है।

इस मौके पर डंडी स्वामी 1008 श्री देवानंद जी महाराज ,सती माता मंदिर के महंत दामोदर दास जी महाराज, आनंद जी महाराज, सोनाणा खेतलाजी के भक्त राजू महाराज,ओटाराम जी देवासी का सानिध्य प्राप्त हुआ।
इस मौके पर कृपारामजी महाराज द्वारा भामासाओ का साफा एवम सोल पहनाकर स्वागत किया गया।
गोभक्त मोती सिंह,भवर रावल, सुरेश प्रजापत,अंकित रावल,लालजी खंडेलवाल, कुलदीप सोनी,जबरसिंह चौहान सहित बड़ी संख्या में भक्तगण मौजूद थे।

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